बाबा नीब करौरी
महापुरुषों, संतों का इस धरा पर अवतरण सम्पूर्ण मानवता के कल्याण के लिए होता हैं । उनका अपना कोई प्रयोजन या स्वार्थ नहीं होता। ऐसा ही महाराज जी की जीवन चर्या से परिलक्षित होता था। उन्हें अपने शरीर को कोई भान नहीं रहता था।भक्तों को ही उन्हें उनके दैनिक क्रियाओं भोजन इत्यदि की याद दिलानी पड़ती थी। वे सदैव भक्तों के कल्याण में, उनके सुख दुःख बाँटने ओर दूर करने में मगन रहते थे। कोई भी व्यक्ति उनके आश्रम से बिना प्रसाद लिए वापस नहीं जा पता था। वे भक्तों की छोटी से छोटी बातों का ध्यान रखते थे। उनके सानिध्य में भक्तों को ऐसा लगता था कि वे एक ऐसे विशाल व्रट व्रक्ष या एक ऐसे विशाल पर्वत की छाया में बैठे हैं जहाँ जीवन की कोई भी आपदा, विपदा या कोई भी झंझावात कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगा। वे सदैव उनकी छाया में आपने आपको पूर्ण रूप से सुरक्षित और आनंदित महसूस करते।महाराज जी का सानिध्य सदैव उनके भक्तों के मन में उल्लास एवं उमंग भर देता था।
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