बाबा नीब करौरी
महाराज जी का वास्तविक परिचय मानवीय सामर्थ्य के बाहर है। प्रकृति के सभी विधाओं पर उनका संपूर्ण अधिकार था। वे अपने आपको कहीं भी स्थापित करने मैं समर्थ थे। वे अपने आपको किसी भी रूप मैं दर्शा सकते थे। उनकी लीला बड़ी ही अदभुत एवम विचित्र थी। वे मात्र छण भर मैं कहीं भी प्रकट हो सकते थे और अद्रश्य भी हो सकते थे। वे केवल उधाहरण मात्र थे किस प्रकार एक अनंत शक्ति स्थूल रूप धारण कर मनुष्यों के कल्याण के लिए दीर्घकाल तक पृथ्वी पर रह सकती है।
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