बाबा नीब करौरी
स्वामी चिदानंद , डिवाइन लाइफ सोसायटी और श्री शिवानंद आश्रम के अध्यक्ष, महाराज जी के लिए कहते है कि "उत्तरी भारत के एक महान आश्चर्य रहस्यवादी संत।" महाराज जी कहते हैं कि लोगों को मेरी सच्चाई जानने के लिए मेरे शरीर से एक एक बाल को नोचना होगा और ताबीज़ बनाना होगा। महाराज जी ने , हालांकि, अपनी दिव्यता को हमेशा छुपा कर रखा। अकबरपुर और नीब करोरी के गांव् ( उत्तर प्रदेश ) के आधे से ज्यादा एक सदी के लिए उसकी लीला के क्षेत्रों थे फिर भी,अपने पैतृक अकबरपुर के निवासियों के लिए वे श्री लक्ष्मी नारायण शर्मा थे इससे ज्यादा वे उनके बारे मैं बहुत कुछ ज्यादा नहीं जानते थे ।
महाराज जी के पास जो कोई भी धैर्य और खुले मन से बिना किसी निश्चित धारणा के आता था वही उनकी झलक पा पाता था। फिर भी यह सब खुद महाराज जी पर ही निर्भर था । किसी को भी दर्शन अधिकार रूप मैं नहीं बल्कि प्रसाद रूप मैं ही प्राप्त हो सकता था। कई बार लोग उनके पास श्रृद्धा भाव से न आकर परिच्छा लेने के भाव से आते थे ऐसे श्रद्धालुओ के सामने महाराज जी अपना व्यवहार जान बूझ कर बदल लेते थे। महाराज जी की कुछ बातें बड़ी अदभुत थी वे कभी कभी गृहस्थ की भांति आचरण करते। वह साधारण लोगों से भी परिवार उनके व्यापार सम्बन्धी सभी विषयों पर बातचीत किया करते थे। वे लोगों की कल्पना के अनुसार आडम्बर से कोसों दूर भगवा वस्त्रों मैं या जटा जूट धारी नहीं थे अपितु धोती और कम्बल लपेटे रहा करते थे।
भेष वस्त्र है सादा ऐसे जाने नहीं कोउ साधू जैसे।
ऐसी है प्रभु रहनि तुम्हारी वाणी कहो रहस्यमय भारी।।
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