बाबा नीब करौरी
एक दिन प्रातःकाल शौच से निवृत्ति होकर महाराज जी सड़क किनारे दीवाल पर बैठे थे । इतने मैं बालक नाम के बाबा ने प्रणाम किया। महाराज जी बोले क्या तकलीफ है ? बालक ने बताया कि कल रात से पेट मैं काफ़ी तकलीफ़ है।महाराज जी ने उसे शौच से बचा हुआ जल दिया ओर थोड़ा इधर उधर चलाया। थोड़ी देर में उसका दर्द जाता रहा। उसी दिन महाराज जी के साथ आए पंडित मामा के भी पेट मैं दर्द हो गया । महाराज जी ने तुरंत उन्हें रेमसे अस्पताल नैनीताल में भर्ती कराया ओर दिन भर दर्शनर्थियों को उनका हालचाल जानने के लिए अस्पताल भेजते रहे। एक भक्त ने उनसे इस भेदपूर्ण व्यवहार का कारण पूछा ? महाराज जी बालक बाबा के सम्बंध मैं बोले, "जिसको कोई देखने वाला नहीं होता उसका भगवान होता है। पंडित सम्पन्न आदमी है वह अच्छा इलाज चाहता है ओर लोगों से सहानुभूति की भी इच्छा रखता है।
श्री बाबा नीब करौरी आश्रम वृन्दावन
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