बाबा नीब करौरी
अक्टूबर का महीना था कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी इसलिए कैंची आश्रम में दर्शनार्थियों की भीड़ कम हो गयी थी। एक दिन दो बजे श्री कुंदन लाल साह इंजीनियर रानीखेत से अपने निवास स्थान बरेली जा रहे थे। आश्रम के पास गाड़ी रोक कर महाराज जी के दर्शन हेतु आप भीतर आ गए।महाराज जी के पास उस समय चार लोग बैठे हुए थे। थोड़ी ही देर बाद कई माइयाँ उनके दर्शन हेतु नैनीताल से आ गयी। महाराज जी ने सब माईओं को भंडारगृह मैं भेज दिया और पूरी बनाने का आदेश दिया। साह जी कहते है सभी लोग मन ही मन यह सोचने लगे की केवल चार पांच लोग उपस्थित है और आश्रम के सभी लोग प्रसाद पा चुके है , इतनी माइयाँ कितनी पूड़ी बनाएंगी !! फिर मन मैं विचार आया की इतनी पूड़ी सब्जी बनाने के पीछे कोई न कोई प्रयोजन तो होगा ही। शाम के सात बजे एकाएक बिना किसी पूर्व सूचना के राजस्थान से स्काउट्स की दो बस पर्वतीय स्थानो का भ्रमण करते हुए द्वारहाट , रानीखेत , होते हुए कैंची आश्रम के द्वार पर आ गयी। महाराज जी बच्चों को देख कर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने सब बच्चों को भरपेट भोजन कराकर तृप्त कर दिया।
श्री बाबा नीब करौरी आश्रम वृन्दावन
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