बाबा नीब करौरी

मुखर्जी दादा के भतीजे को चेचक की बीमारी हो गयी और बीमारी इतनी बढ़ गयी की ऐसा लगने लगा की अंतिम समय आ गया है। तब सभी ने मिलकर सोचा और उसको फर्श पर उतार लिया और अंतिम उपाय के तौर पर सभी ने यह सोचा की गंगाजल की कुछ बुँदे जिनसे महाराज जी के चरणो को धोया गया था उसके गले मैं डाल दी जाएँ। जैसे ही बुँदे गले मैं डाली गयीं चमत्कार हो गया लड़का शने: शने: ठीक होने लगा और कुछ दिनों में उसकी चेचक पूर्ण रूप से ठीक हो गयी। महाराज जी उस समय सिद्धि माँ के साथ सैकड़ो मील दूर पहाड़ियों पर थे उसी समय महाराज जी के शरीर पर दाने दाने उभर आये। पहाड़ो पर उस समय कोई चेचक को कोई जानता भी नहीं था सभी ने समझा की कोई एलर्जी हो गयी है ग्रामीणो ने एक मरहम लगाया उससे वो ठीक हो गयी। महाराज जी बोले, " यह तो बहुत ही अच्छा मरहम था।मुझे शायद किसे चीज़ से एलर्जी हो गयी थी।" काफी समय समय बाद ही ज्ञात हुआ की महाराज जी ने बच्चे की बीमारी को अपने ऊपर ले लिया।
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