बाबा नीब करौरी
महाराज जी की एक कनाडाई भक्त सुनन्दा मार्कस अमेरिका के डॉक्टर लॉरी द्वारा संचालित सेवा फ़ाउंडेशन के कार्य से अपनी सहयोगी मीरा बुश के साथ मध्य अमेरिका के ग्वाटेमाला नामक देश में वर्ष १९९२ मैं काम कर रही थी। वहाँ एक दिन सुदूरवर्ती गाँव से ये लोग राजधानी स्थित अपने होटल लौट रहे थे तभी रास्ते में एक निर्जन घने पहाड़ी युक्त जंगल में आपकी गाड़ी एकाएक बंद हो गयी। आपके ड्राइवर ने एक एक कर सभी कालपुरजों की चेकिंग कर डाली ओर सभी को ठीक पाया। धीरे धीरे रात होने लगी। सुनन्दा ओर मीरा घबरा गयी कि इस सुनसान पहाड़ी जंगल मैं इतनी ठंड मैं कैसे रात बिताएँगीं ओर मीलों दूर स्थित अपने होटेल में कैसे पहुँचेंगी ? तभी सुनन्दा महाराज जी का ध्यान करते हुए उनसे इस कठिन परिस्थिति से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना करने लगीं। तभी उन्हें अपने कानों में महाराज जी की स्पष्ट वाणी सुनाई दी !!! चेक द फ़्यूज़। सुनन्दा मानो सोते से जाग उठी ओर उसने ड्राइवर को फ़्यूज़ चेक करने का आदेश दिया। चेक करने पर पता चला की चार फ़्यूज़ में से एक फ़्यूज़ जल गया है !!! ड्राइवर ने तुरंत नया फ़्यूज़ लगा दिया। फ़्यूज़ लगते ही गाड़ी स्टार्ट हो गयी और आप समय से होटेल पहुँच गयी।
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