बाबा नीब करौरी
महाराज जी जब भी वृन्दावन जाते अपने साथ के लोगों को धर्मशाला मैं या अन्यंत्र ठहराया करते थे और परिक्रमा मार्ग में जहाँ अब गोरे दाऊजी का मंदिर है, हाथी वाले बाबा के पास ठहरा करते थे। पहले यहाँ केवल मात्र हाथी वाले बाबा की एक झोपडी थी, उसके पास नीम के पेड़ के नीचे महाराज जी लेटा करते थे। यह भूमि अत्यंत शुष्क एवं उबड़ - खाबड़ हुआ करती थी और यत्र तत्र बेर और कटीली झाड़ियों के अतिरिक्त कुछ भी नहीं दिखाई देता था। महाराज जी का आकर इस स्थान पर लेटना, मनोरा पर्वत, नैनीताल की भांति इस भूमि को अपनाना था। आपने इस निर्जन एवं तिरस्कृत भूमि को मंदिर एवं आश्रम के निर्माण हेतु चुना। आपने इस चुनाव पर भक्तों का कोई उत्साह न देख कर महाराज जी स्वयं कहने लगे , " आगे चलकर यहाँ नगर बस जाएगा।" आज हम सदृश देखते है की उनके चरण राज के प्रताप यहाँ लोकप्रिय नगर बस गया।
#Jai_Gurudev...👏❤
#जय#गुरुदेव
#Jai#Gurudev
#babaneebkarorimaharaj.com
#www.babaneebkarori.in
#www.babaneebkarori.org
#Mahasamadhisthal
#samadhi#sthal
#vrindavan
Comments
Post a Comment