बाबा नीब करौरी
श्री पूरन चंद जोशी नैनीताल में महाराज जी के पुराने भक्तों में से है । आपकी पत्नी श्रीमती कमला जी को महाराज जी के दर्शन करने की इच्छा बहुत समय से थी परंतु ग्रह कार्यों में व्यस्त रहने की वजह से संयोग नहीं बन पा रहा था। एक दिन आपने अपने पति से इच्छा व्यक्त की। भाग्यावश उस दिन महाराज जी मल्लिताल में आपके ही घर के पास डॉक्टर भट्ट की निवास स्थान पर आये हुए थे। जोशी जी ने आपसे कहा कि दूसरे दिन तड़के आप दर्शन कर सकती है। उस दिन आप सुबह तड़के उठकर स्नान आदि से निव्रत होकर भगवान का पूजन करने लगी। पूजा के स्थान पर जब आप महाराज जी के छाया चित्र पर चंदन से ओम् अंकित कर रहीं थी तो एकाएक आपके मन में विचार उठा कि यदि महाराज जी सिद्ध होंगे तो उनका इस प्रकार ओम् लिखना जान गए होंगे।
पूजा समाप्त करने के पश्चात जब महाराज जी के प्रथम दर्शन करने पहुँची तो आपने उनको प्रणाम किया तो महाराज जी बोल उठे की , " फ़ोटो पर ओम् लिख कर आयी है। " महाराज जी के यह शब्द सुनकर आप आश्चर्य चकित रह गयीं। आपके मन मैं कोई परीक्षा का भाव नहीं था विचार आपके मन में स्वतः ही उत्पन्न हुआ था।
श्री बाबा नीब करौरी आश्रम वृन्दावन
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