बाबा नीब करौरी महाराज
एक बार में नैनीताल में एक गाँव में एक घर के बाहर खड़ा था तभी वहाँ महाराज जी अचानक ही बिना किसी पूर्व सूचना के आ गये। मुझसे बाहर ही खड़े रहने को कहा गया इससे मुझे उनके पास जाते हुए लोगों को देखने का अवसर प्राप्त हुआ। कुछ औरतें आटे से सने हुए हाथो के साथ, कुछ औरतें अपने अधनंगे बच्चों के साथ भाग रही थीं, कुछ दुकानदार अपनी दुकानों को ख़ाली छोड़कर, कुछ फूल लेकर, कुछ फल लेकर चारों दिशाओं से आ रहे थे उनके चेहरों पर जो आनंद, आदर, प्रेम, ओर श्रद्धा का भाव था उसका वर्णन नहीं किया जाता सकता।
रामदास
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