बाबा नीब करौरी महाराज
महाराज जी अक्सर माइयों से कहते की भोजन जिस भावना से तैयार किया जाता है वह हमारी मानसिक स्थिति को काफ़ी हद तक प्रभावित करता है। यदि भोजन सात्विक विचारों के साथ तैयार किया जाता है तो वह मन को शुद्ध करता है। परंतु यदि बहुत ही सात्विक व्यक्ति भी यदि बिना सजगता के साथ बनाए गए खाने को खा लेता है तो वह भोजन उसके मन मैं भ्रम की स्थिति पैदा कर देता है। महाराज जी कहते थे कि सात्विक विचारों के साथ बनाया गया सात्विक भोजन योगी को महान बना देता है।
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