बाबा नीब करौरी
कभी कभी महाराज जी कहते इस जीवन में हम उन्ही से मिलते है, जिनसे हमारा मिलना पहले से निश्चित होता है। प्रत्येक व्यक्ति से संपर्क की अवधि भी निश्चित होती है इससे अधिक न रहने पर बिछुड़ने का दुःख नहीं होना चाहिए। कभी वे शरीर के सम्बन्ध मैं कहते की ये प्रेत यान है।हर किसी को मारना है।व्यक्ति रोता है स्वार्थ और मोह के कारण।कभी कहते की इस संसार मैं जो आया है उसे जाना ही होगा। कोई यहाँ नहीं रह सकता। महाराज जी कहते हैं कि जब संत अपना शरीर शांत कर लेते है तो "उनका आश्रम ही उनका शरीर हो जाता है।" एक बार आप वार्तालाप करते हुए बोले," हम नहीं मरेंगे।"
बिलकुल सत्य कहा करते थे वे आज भी अपने भक्तों के दिल मैं विद्यमान है और आवश्यकता पड़ने पर हर संभव सहायता करते है और मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों से हमको निकाल लेते हैं।
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