बाबा नीब करौरी
यदि किसी बात को महाराज जी चाहें कि कोई तीसरा व्यक्ति न सुन सके, वह बात नहीं सुनी जाता सकती थी। ऐसी कई घटना है। एक बार महाराज जी कैंची आश्रम मैंअपनी कुटिया मैं बैठे थे। एक फ़ौजी अफ़सर उस समय कुटिया मैं आया ओर महाराज जी के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। वहीं पर किशन लाल साह अपनी सात साल की लड़की के साथ बैठे थे। उनकी लड़की की नज़र उस फ़ौजी के कानों पर पड़े लंबे बालों पर पड़ी। लड़की को हँसी आ गयी ओर अपने पिता के कान मैं फुसफुसाते हुए कुछ कहने लगी। सामने तख़्त पर बैठे महाराज जी ने सुनने के लिए अपना सर झुकाया परंतु लड़की अपनी बात कहकर चुप हो गयी। महाराज जी ने उसके पिता से पूछा की " लड़की क्या कह रही है।" पिता असमंजस में पड़ गये कि कुछ कहेंगे तो फ़ौजी सुन लेगा। महाराज जी सब कुछ समझ कर भी उनके मुँह से सुनना चाह रहे थे। उन्होंने फिर कहा " बोलता नहीं " श्री साह के पास कोई चारा नहीं रह गया था कि वह लड़की की बात न बतायें। उन्होंने महाराज जी को बता दिया। महाराज जी बोले " चुप करा लड़की को ।" महाराज जी की कृपा से खड़ा फ़ौजी अफ़सर कुछ भी न सुन सका , इसलिए उसकी भाव भंगिमा यथावत बनी रही ।
श्री बाबा नीब करौरी आश्रम वृन्दावन
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