बाबा नीब करौरी

एक दिन महाराज जी गंगा किनारे टहल रहे थे। टहलते टहलते वे कुछ साधुओं की कुटिया के सामने से गुज़रे तो वे साधु, महाराज जी से पूछने लगे कि वे कहाँ रहते हैं ओर क्या खाते हैं । महाराज जी बोले उनका कोई निश्चित निवास नहीं है वे तो घुमक्कड़ी साधु हैं ओर जो मिलता है खा लेते हैं। उन साधुओं ने महाराज जी से वहीं रुकने के लिये कहा। महाराज जी ने पूछा कि वे उन्हें भोजन कराएँगे साधुओं ने उत्तर दिया कि बिलकुल कराएँगे। महाराज जी उनकी कुटिया मैं बैठ गये। वहाँ पर बैठे साधु लोग चिलम बनाने लगे ओर पीते हुए एक दूसरे को आगे बढ़ाने लगे अंत में जैसे ही एक साधु ने महाराज जी की तरफ़ चिलम बड़ाई तो महाराज जी का ग़ुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुँचा ओर महाराज जी उनसे घटिया एवं ढोंगी साधु कहते हुए जो अपने आपको बर्बाद कर रहे हैं कुटिया से निकल गये। महाराज जी के कुटिया से निकलने के पश्चात उनका एक साथी साधू कुटिया में आता है ओर बाक़ी साधुओं से पूछता है की वो लोग क्या महाराज जी को नहीं पहचान पाये। वह बोला तुम लोग किस तरह के साधु हो जो सिद्ध महापुरुष के व्यक्तिगत रूप कुटिया मैं आने के पश्चात भी नहीं पहचान पाये। वे सभी साधु मिमियाते हुए बोले की " हम उन्हें कैसे पहचान पाते वे तो इतने साधारण लग रहे थे ओर उनका व्यवहार भी अत्यंत साधारण था।"
श्री बाबा नीब करौरी आश्रम वृन्दावन
#Jai_Gurudev...👏❤
#जय#गुरुदेव
#Jai#Gurudev
#babaneebkarorimaharaj.com
#Mahasamadhisthal
#samadhi#sthal
#vrindavan

Comments

Popular posts from this blog

Jai guru dev

Neeb Karori Baba || Neem Karoli Baba || Maharajji || Ram Dhun at Vrindav...