बाबा नीब करौरी
महाराज जी से मिलने से वर्षों पूर्व जब मैं इधर उधर भटक रहा था ओर विभिन्न प्रकार की आध्यात्मिक प्रक्रियाओं का अध्ययन कर रहा था तो मैंने अपने लिए कुछ कड़े नियम बनाये जैसे पूर्णतया ब्रह्मचर्य का पालन , प्रातः काल सुबह तीन बजे उठना, ठंडे पानी से नहाना , आसान एवं ध्यान लगाना। यह वह समय था जब मैंने चाय ओर कॉफी भी छोड़ दी थी । जब मैं महाराज जी से मिला तो हमको चाय दी गयी मेरी समझ मैं नहीं आया की मैं क्या करूँ । मैंने कुछ नहीं कहा पर चाय स्वीकार नहीं की यह देखकर महाराज जी मेरी तरफ़ झुके ओर बोले , " क्या चाय नहीं लोगे ? चाय ले लो !! तुमको चाय पीनी चाहिये। तुम्हारे लिए इस मौसम मैं यह ठीक रहेगी। मैंने चाय ले ली। उस एक कप चाय के साथ मेरे बनाये गये सारे नियम क़ानून धुल गये। अब मुझे वे सारे नियम निरर्थक नज़र आने लगे। सही कार्य ओर सही सोच इस सबसे कहीं आगे होती है ओर मैंने चीज़ों को अपने जीवन मैं उसी तरह लेना शुरू किया जैसे जैसे वो आती गयीं।
रामदास ।
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