बाबा नीब करौरी
महाराज जी स्वार्थी दर्शकों का विश्वास अपने उपर स्थिर नहीं होने देते थे पर शहद को देख कर उस पर मक्खियों का मँडराना स्वाभाविक था। उनकी बातें उलटी सीधी हुआ करती थी परंतु उनका परिणाम भूमि मैं बोए गये बीजों की भाँति सदा शुभ ही रहता । इस सम्बंध में अपने एक भक्त की शंका के उत्तर में एक बार कहा था, " अगर आदमी हमें जान जाएगा तो दुनियाँ हमारे रोम रोम को नोच नोच कर ताबीज़ बना लेगी।" आप अपनी योग माया से उनकी बुद्धि पर ऐसा पर्दा डालते कि आपके दर्शन के आगे आपकी लीला सामान्य प्रतीत होती। आप मूलतः करुणा ओर कृपा की साक्षात मूर्ति थे।
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