बाबा नीब करौरी
दिल्ली के एक वैद्य जी जो कि महाराज जी को जानते नहीं थे परंतु महाराज जी द्वारा भेजे गए अनेक मरीज़ों का उपचार कर चुके थे। श्री आर . एस . यादव ( बी . डी . ओ. ) के सुझाव पर महाराज जी से मिलने कैंची आश्रम आये। वैद्य जी के साथ दो व्यक्ति ओर आये , महाराज जी ने सभी को एक एक पेटी सेब की देकर विदा किया। वैद्य जी ने आश्रम मैं कुछ दिन रुकने की इच्छा व्यक्त की परंतु महाराज जी ने उन्हें एक दिन नैनीताल रुक कर सीधे दिल्ली जाने की आज्ञा दी। वैद्य जी जैसे ही जाने के लिये उठे तो महाराज जी बोल उठे , " अब तू हमें नहीं देख पायेगा।"
वैद्य जी महाराज जी की बातों का सही आशय नहीं निकाल सके ओर उसको उन्होंने अपने उपर ले लिया ओर अपने हिसाब किताब एवं लेंन देंन पूरा करने लगे। वे समय रहते तीर्थ यात्राएँ भी कर आये ओर लौट कर अपनी मृत्यु का इंतज़ार करने लगे। कुछ समय पश्चात उनको महाराज जी के महा प्रयाण की सूचना मिली तब जा कर वे महाराज जी के वचन का आश्रय समझ पाये।
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