बाबा नीब करौरी
गुरु का कार्य अपने शिष्य के अंदर छिपी हुई मौलिक दिव्यता से उसका परिचय कराना होता है। महाराज जी का जन्म मनुष्य सभ्यता को रास्ता दिखाने के लिए हुआ था। वह रास्ता था ---- अपने जीवन को सरल बनाओ , अपने हृदय को निर्मल रखो , अहंकार एवं मिथ्याभिमान से अपने आपको प्रभावित न होने दो , सभी के लिए अपने ह्रदय मैं प्रेम रखो , आत्म संयम का अभ्यास करो , सभी के प्रति सेवा भाव रखो , सभी को भरपेट भोजन कराओ , अपने आपको पहचानो , और शाश्वत आनंद में सदा रहने की कोशिश करो।
केवल एक ही भाषा को याद रखो ह्रदय की , एक ही धर्म को याद रखो प्रेम का। इस संसार में एक ही सूर्य है , एक ही चन्द्रमा है , एक ही आकाश है , एक ही चेतना है , और एक ही सर्वोच्च सत्ता है। सदा अखंडता का अनुभव करो , सद्चितानन्द आत्मा को पहचानो ,और उस चेतना को जो हम सबमे सामान रूप से उपस्थित है पहचानो। सारी बहुरूपता , सारे नाम , सारे गुण , सारे मतभेद , सारे मानसिक सृजन , कल्पनाएँ अपने आप विसर्जित हो जाएंगे और शेष रह जाएगा केवल आनंद।
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