बाबा नीब करौरी

यह बाबा नीब करौरी वृंदावन आश्रम स्थित वह दिव्य स्थान है  जिसे बाबा नीब करौरी महाराज ( महाराज जी ) ने अपनी भौतिक लीलाओं को विराम देने के लिए चुना।वह कैंची आश्रम से आगरा आए ओर वहाँ से अपने छोटे सुपुत्र श्री धर्म नारायन शर्मा जी को लेकर अपनी पूर्व नियोजित लीला के अनुसार वृंदावन आकर तीन बार " ओम् जय जगदीश हरे " कहते हुए ११ सितम्बर १९७३ अनंत चतुर्दशी के दिन समाधि ली ओर अपने पूर्व मैं कहे हुए कथनानुसार कि " मैं तो याहीं बैठूँगो " उसी स्थान पर अपने शरीर को पंच तत्त्व मैं विलीन कर दिया ।
महाराज जी आज भले ही हमारे बीच भौतिक रूप से विद्यमान न हों परंतु उनकी  उपस्थिति का अहसास एवं अनुभूति उनके आश्रमों मैं सदैव होती हैं । वृंदावन आश्रम स्थित कुटिया मैं बैठकर ऐसा प्रतीत होता है कि वह सजीव रूप से आज भी अपने तख़्त पर विराज मान है । अपने भक्तों को मुश्किल एवं कठिन परिस्थितियों में देखकर उनकी पुकार सुनकर आज भी वैसे सहायता एवं मार्गदर्शन करते हैं जैसे अपने जीवन काल मैं किया करते थे।
आइये हम सभी इस पवित्र स्थान को नमन करें।

जय गुरुदेव।

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