बाबा नीब करौरी
महाराज जी की भक्ति केवल पुरुषों तक ही सीमित नहीं रही जो भी महाराज जी का भक्त बनता सपरिवार ही बनता था। महाराज जी के भक्तों की सूची तैयार करना संभव नहीं है। संपूर्ण विश्व एवं देश के कोने कोने से लोग बिना किसी प्रचार के केवल आपकी प्रेरणा से आपके पास आते थे। सबसे आश्चर्य की बात यह है महाराज जी द्वारा अपनी नित्य लीला सं १९७३ में ही समाप्त कर देने के पश्चात भी उनके बनने वाले भक्तों की संख्या में कोई कमी नहीं हुई वरन वे दिन दुने रात चौगुने बढ़ते ही जारहे है। भक्त एवं भगवान सजातीय होते है, इनका सम्बन्ध आत्मीय होता है। इस प्रकार महाराज जी ने एक वृहद परिवार का निर्माण किया जिसमे सभी वर्ग, वर्ण, और धर्म के लोग शामिल है। इसका जीता जागता प्रमाण हम सभी का फेस बुक के माध्यम से जुड़ना है जिसके माध्यम से हम सभी महाराज जी की यशोवार्ता का आनंद प्रतिदिन उठाते है यह सब महाराज जी की ही कृपा है की हम सब एक सूत्र में बंधे हुए हैं।
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