नीब करौरी बाबा
श्री हुकम चंद जी , सिंध के रहने वाले थे । हिंदुस्तान ओर पाकिस्तान के विभाजन के समय आप १९४७ में आप मद्रास में आकर व्यापार करने लगे । स्वभाव से आप साधु प्रकृति के थे आप मद्रास में वैष्णवी देवी मंदिर एवं आश्रम के अध्यक्ष , एक विद्वान गृहस्थ संत से सत्संग किया करते थे । महाराज जी ने अपने परिकरों को वैष्णवी देवी के दर्शन कराए ओर उस ग्रहस्थ संत को दर्शन दे कर कृतार्थ किया। महाराज जी के चले जाने के पश्चात जब हुकुम चंद जी उन संत महोदय से जब मिले तो उन्होंने महाराज जी के दर्शन करने का सुझाव उन्हें दिया ओर सिंधी धर्मशाला का पता भी बताया । आप महराज जी को पहचानते नहीं थे इस कारण आप इस धर्मशाला में आकर लौट गए दूसरी बार भो आप निराश हो कर लौट ही रहे थे की एकाएक महाराज जी ने रमेश जी को भेज कर आपको बुलवाया । जब आप महराज जी के कमरे में द्वार पर पहुँचे तो आपने कुछ माइयों को महाराज जी के चरण दबाते देखा तो आपकी भावना विकार ग्रस्त हो गयी ओर आप प्रवेश करने में सकुचाए , परंतु जब आपकी दृष्टि महाराज जी के मुस्कान भरे मुख मंडल पर पड़ी तो महाराज जी की दिव्य दृष्टि से आपकी भावनाएँ शुद्ध हो गयीं ओर आप नत मस्तक हो महाराज जी के सामने खड़े हो गए । महाराज जी ने आपसे अगले दिन आने को कहा।
Jai_Gurudev...👏❤
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