नीब करौरी बाबा
महाराज जी एक बार भक्त मंडली के साथ काशी से हल्द्वानी की यात्रा कर रहे थे। किशन चौबे जी ने महाराज जी का द्वितीय श्रेणी का ओर बाक़ी तृतीय श्रेणी के सात टिकट लेकर दे दिए। सभी लोग महाराज जी के साथ बैठे हुए थे ओर पंडित जी त्रतीय श्रेणी में बैठे हुए थे । महाराज जी ने पूछा , " सभी के टिकट ले लिए । " एक भक्त बोला हाँ महाराज जी पूरे हैं। महाराज जी कड़ककर बोले , " पंडित का टिकट कहाँ है ? " सभी को इस भूल पर काफ़ी खेद हुआ। महाराज जी ने सारे टिकट अपने पास लिए ओर उन्हें चलती गाड़ी से बाहर फेंक दिया। सभी को महाराज जी ने बे टिकट बना दिया। उसी दिन ट्रेन मैं स्पेशल चेकिंग हो गयी। महाराज जी के साथ बैठे सभी भक्त गण राजकीय कर्मचारी थे। सभी को अपनी नौकरी जाने का भय सताने लगा। अगला स्टेशन आते ही महाराज जी अपने डिब्बे से उतर कर पंडित जी के साथ बैठ गए। सारे भक्त भी उतरकर महाराज जी के साथ बैठ गए। महाराज जी ने अपने भक्तों को भयभीत देखकर एक भक्त के हाथ मैं नौ टिकट रख दिए।
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