नीब करौरी बाबा

हनुमान गढ़ी, नैनीताल के पास किशनपुर में महाराज जी कभी कभी श्री शिव दत्त जोशी जी के यहाँ आकर ठहरा करते थे । उनके वहाँ आने पर वहाँ लोगों के आने जाने का क्रम इसी प्रकार दिन रात चलता रहता था कि ग्रहस्वामिन को कमरा साफ़ करने मैं काफ़ी कठिनाई होती थी।
एक दिन महाराज जी बोले, " भगवान सहाय ( राज्य पाल, उत्तर प्रदेश ) आ रहा है। " इससे ग्रहस्वामिन की चिंता ओर बढ़ गयी। दरवाज़े पर जूतों का अंबार लग गया था कि झाड़ू लगाना सम्भव नहीं था। मन की जानने वाले महाराज जी तुरंत सामने की सड़क पर निकल गए ओर वहीं कुछ दूर पर किनारे एक दीवार पर जा बैठे। सभी भक्त गण अपने अपने जूते पहनकर वहाँ आ गये । इस प्रकार ग्रहस्वामिन को सफ़ाई करने का मौक़ा मिल गया। सफ़ाई होने के पश्चात पुनः महाराज जी का दरबार लग गया। इतने मैं भगवान सहाय आ पहुँचे। उन्होंने महाराज जी को बड़े विनम्र भाव से प्रणाम किया ओर द्वार के पास पड़े जूतों के पास जा बैठे। महाराज जी कुछ बोले नहीं, प्रसन्न मुद्रा में उनको देख कर मुस्कुराते रहे। एक भक्त ने उनसे अंदर बैठने के लिये कहा पर वे माने नहीं, एकटक दृष्टि से महाराज जी के दर्शन करते रहे । महाराज जी ने उन्हें प्रासाद दिलवाया ओर वे उनकी आज्ञा पाकर चले गये ।

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