नीब करौरी बाबा

महाराज जी की सृजनात्मकता का रूप यह भी था की वे किसी को भी माध्यम बनाकर कल्याणकारी लीलाओं को सम्पन्न करते रहते थे । ऐसी अनेक लीलाएँ थी कि उन्होंने अपने आप को , अपनी सत्ता को , अपनी शक्ति को गुप्त रख कर उस माध्यम को ही कार्य संपादन के लिये श्रेय देते हुए स्वयं सभी के समकक्ष उसका गुणगान करने लगते।
हरदा बाबा जो अमेरिका चले गए थे उनका वीज़ा केवल अल्पकाल के लिए ही था ओर उन्हें वहाँ अधिक रहना था। इस संदर्भ में महाराज जी बार बार रामदास से कहते , हरदा को ग्रीन कॉर्ड दिलवाना है । क्या तुम अमेरिका के राष्ट्रपति को जानते हो ? क्या तुमने उसके साथ चाय पी है ? " रामदास नकारात्मक उत्तर दे कर अपनी लाचारी प्रकट करने लगते। अब महाराज जी की लीला का दूसरा भाग शुरू होता है। उसी समय नैनीताल मैं एक अमेरिकन वक़ील जो रामदास का मित्र था घूमने के लिए आया हुआ था यहाँ उनकी मुलाक़ात रामदास से होती है। रामदास उसे महाराज जी के बारे मैं विस्तार से बताते हैं जिज्ञासा वश वह महाराज जी के दर्शन की आकाँक्षा व्यक्त करता है ओर दोनों कैंची धाम आ जाते हैं। वह महाराज जी के दर्शन पाकर कृतार्थ हो अत्यंत कृतज्ञता से रामदास से धन्यवाद सहित बोलते हैं, " मैं तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूँ। " रामदास को कुछ नहीं सूझता है वे एकाएक बोल उठते है की , " महाराज जी हरिदास बाबा नाम के एक व्यक्ति को अमेरिकन ग्रीन कॉर्ड दिलवाना चाहते हैं। मैं काफ़ी दुखी हूँ इस विषय मैं कुछ भी नहीं कर पता रहा हूँ। "
वक़ील दोस्त बोल उठते हैं , " यह कौन सी बड़ी बात है। मेरा भाई वहाँ प्रेज़िडेंट हाउस में बड़ी पोस्ट पर है । चिंता मत करो मुझे पूरा विवरण दो। वह सब कुछ ठीक करा देगा । अंत में काम हो जाता है।
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