बाबा नीब करौरी
एक बार हॉर्वर्ड विश्व विध्यालय के एक प्रोफ़ेसर ओर उनकी पत्नी महाराज जी के दर्शन करने के लिए आए । उनकी पत्नी चित्रकार थी उन्होंने महाराज जी का चित्र बनाया । उस रात वे सख़्त बीमार पड़ गयी , ज्वर से काँपने लगी ओर जब खाँसती तो मुख से ख़ून आने लगता । यह बिलकुल ही असाधारण बात थी क्योंकि वे एकदम स्वस्थ थी । प्रोफ़ेसर साहब का बहुत ही व्यस्त कार्यक्रम था उन्हें उसी रात दिल्ली छोड़ना था । डाक्टर साहब ने कहा की उनकी पत्नी को यात्रा करने लायक होने मैं एक सप्ताह का समय लगेगा । उन्होंने पत्नी को एक सुविधाजनक जगह छोड़ने की तैयारी कर ली । जब वे उसे छोड़ने जा रहे थे तो उन्होंने मंदिर के समीप आकर कार रोक दी ओर पत्नी के साथ महाराज जी के दर्शन करने अंदर गए । उनकी पत्नी ज्यों ज्यों महाराज जी के समीप पहुँचती त्यों त्यों वह अपने आपको स्वस्थ महसूस करने लगी ओर जब वे महाराज जी के समक्ष पहुँची तो अपने आपको पूर्णतया स्वस्थ महसूस करने लगी । महाराज जी उनकी ओर देख कर मुस्कुरा रहे थे । उस महिला ने जो महाराज जी का चित्र बनाया था निकाल कर महाराज जी के समक्ष रख दिया । महाराज जी ने उसके चारों ओर राम राम लिख दिया ।
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