बाबा नीब करौरी

#महाराज जी की #महासमाधि की पश्चात महाराज जी की एक #अमेरिकी #भक्त डॉक्टर रिचर्ड अल्पेर्ट , प्रोफेसर मनो विज्ञान हार्वर्ड विश्व विद्यालय बोस्टन ने किया , जिन्हे महाराज जी ने भारतीय नाम " रामदास " दिया | आपने सन् १९७१ में अपनी पुस्तक " बी हियर नाउ "  में महाराज जी का संक्षिप्त विवरण दिया था | इस पुस्तक में उन्होंने बताया कि किस प्रकार आपकी परिणति #डॉक्टर रिचर्ड अल्पेर्ट से रामदास में  हुई | इस पुस्तक से आपकी सभवतः आपकी संतुष्टि नहीं हुई , इसलिए आपकी महाराज जी की ही प्रेरणा से महासमाधि कि ६ वर्ष पश्चात १९७९ में आप " #मिरेकल_ऑफ़_लव " लिखने में सफल रहे | इसका प्रकाशन संयुक्त राज्य अमेरिका से हुआ | इस पुस्तक कि फलस्वरूप इस विश्व को इस _अलौकिक महापुरुष ( जो की समकालीन संतों एवं विद्वानों द्वारा साक्षात् हनुमान जी कि अवतार कहे जाते है ) जानने का अवसर मिला |
महाराज जी की विभिन्न लीला एवं कथाओं का वर्णन अनेक भक्त पूर्व में उनके अनेक भक्त "#अलौकिक_यथार्थ " ( श्री रवि प्रकाश पण्डे जी ) , "#अनन्त_कथामृत " ( श्री मुकुंदा ) ," इट आल एबाईडस बाई लव ' ( जय राम रैनसम ) , #बेयर_फुट_इन_द_हार्ट ( #केशव_देव ) ,  #बाई_हिज_ग्रेस ( #दादा_सुधीर#मुखेर्जी ) आदि में कर चुके है और आगे भी कई भक्त करते रहेंगे |
परन्तु वास्तविकता यह यह है कि कोई भी भक्त महाराज जी की जीवनी या उनके साथ अपने अनुभवों का वर्णन न्याय संगत नहीं कर सकता | महाराज जी की एक अमेरिकन भक्त अंजनी ( तअोस , नई मेक्सिको ) ने कहा है कि " महाराज जी की कोई जीवनी या उनका कोई वर्णन नहीं हो सकता वे वर्णनातीत हैं | हम केवल अपने ह्रदय में उनकी अनुभूति ही कर सकते हैं कि किस प्रकार उनकी उपस्थिति  में  भक्तों पर  एक नैसर्गिक आनंद एवं परम शांति की वर्षा सदैव होती रहती थी | इस परम आनंद और परम शांति का आज भी जब भक्त जन महाराज जी के आश्रमों में उनके सम्मुख जाने पर और #सत्संग करने पर अनुभव उसी प्रकार किया करते है जिस प्रकार उनके जीवन काल में किया करते थे उसमें किंचित मात्र की भी कमी नहीं आई है |
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