गुरु
गुरु की आवश्यकता सबको है। गुरु #संत हो या असंत उनमें शिष्य की #श्रद्धा हमेशा होती है। #शिष्य के लिए गुरु ही #प्राण है। गुरु देखने में चाहे #सुंदर हो या #कुरुप, #करुणापूर्ण हो यह हमेशा गाली देने वाला वह शिष्य के लिए गुरु ही है। गुरु के बिना #आध्यात्मिक जीवन में रास्ता नहीं है। यह कोई आवश्यक नहीं कि #गुरु आपको #क्रिया #योग या #तंत्र सिखा दें। यदि गुरु ने आप को शिष्य रूप में स्वीकार किया है तो वही #प्रकाश है उससे आप का विकास होता है और अपने लक्ष्य तक पहुंच जाते हैं। इसमें कोई संदेह की बात नहीं की #जीवन गुरु के बिना #सदैव #अपूर्ण है।
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