बाबा नीब करौरी

Cont....#महाराज जी के पास जो कोई भी धैर्य और खुले मन से बिना किसी निश्चित धारणा के आता था वही उनकी झलक पा पाता था । फिर भी यह सब खुद महाराज जी पर ही निर्भर था । किसी को भी #दर्शन #अधिकार रूप मैं नहीं बल्कि प्रसाद रूप मैं ही प्राप्त हो सकता था । कई बार लोग उनके पास #श्रृद्धा भाव से न आकर #परीक्षा लेने के भाव से आते थे ऐसे #श्रद्धालुओ के सामने महाराज जी अपना व्यवहार जान बूझ कर बदल लेते थे। महाराज जी की कुछ बातें बड़ी #अदभुत थी वे कभी कभी गृहस्थ की भांति आचरण करते। वह साधारण लोगों से भी परिवार उनके व्यापार सम्बन्धी सभी विषयों पर बातचीत किया करते थे। वे लोगों की कल्पना के अनुसार #आडम्बर से कोसों दूर #भगवा वस्त्रों मैं या जटा जूट धारी नहीं थे अपितु #धोती और #कम्बल लपेटे रहा करते थे।

भेष वस्त्र है सादा ऐसे जाने नहीं कोउ साधू जैसे।
ऐसी है प्रभु रहनि तुम्हारी वाणी कहो रहस्यमय भारी।।
#जय #गुरूदेव।

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