बाबा नीब करौरी
Cont....#सन् #१९५० से लेकर अपनी #महासमाधि तक वे कभी भी एक स्थान पर अधिक समय तक नहीं रहे| अपनी #ख्याति और #यश के प्रति सदा #उदासीन श्री #महाराज जी ने इन #मंदिरों और #आश्रमों में कहीं अपना नाम नहीं आने दिया। सभी मंदिरों और आश्रमों को #हनुमान जी के नाम से निर्माण कराने के उपरांत उनकी समुचित व्यवस्था कर विभिन्न स्थानीय #न्यासों को सोंपते चले गये। सर्वथा अपने को तटस्थ रखते हुए उन्होंने यह #महत्कार्य किया। आश्रमों का विस्तार तो उनके #भक्तों ने आपकी महासमाधि के पश्चात किया और मंदिरों एवं आश्रमों से श्री महाराज जी का नाम भी इसी #श्रद्धा और #विश्वास की भावना से जुड़ गया | cont.....
#जय#गुरूदेव ।
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