सदाचार


# नैतिक और #सदाचारी व्यक्तित्व के महत्व को भलीभांति जान लेना चाहिए। अपने आप को धोखा नहीं देना चाहिए नियमित रुप से अपनी #साधना करते रहना चाहिए और भगवत #कृपा के लिए सच्चे दिल से प्रार्थना करनी चाहिए। साधना में नियमितता अत्यावश्यक है इस भ्रम में कभी नहीं रहना चाहिए कि हम आध्यात्म के शिखर पर पहुंच गए हैं #धैर्य के साथ साधना के परिणामों की #प्रतीक्षा करनी चाहिए जब हमारा व्यक्तित्व रूपांतरित होकर पूरी तरह तैयार हो जाएगा तब #भगवत्कृपा अपने आप प्रवाहित होने लगेगी आत्मा की गहराइयों में ज्ञान की रश्मियां स्वयमेव झिलमिलाने लगेंगे तब हम अपने आप को अभिमान, दम, कठोरता और वासना से मुक्त कर देंगे और दिव्यानंद अपने आप ही हमारे अंतरतम को भर देगा हम दिव्य ज्ञान और शांति से परिपूर्ण हो जाएंगे जहां #करुणा #विनम्रता और शुद्धता है वहीं #आध्यात्मिकता का प्रादुर्भाव होता है वही #साधुता अवतरित होती है वहीं दिव्यात्मा चमकती है और वहीं परिपूर्णता साकार हो जाती है

#जय गुरुदेव।

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