प्रेम

#प्रेम ही #आत्मा का #परमात्मा से मिलन करवाता है प्रेम ही एक ऐसी अनुभूति अथवा भाषा है जिसे मनुष्य ही नहीं वरन पशु-पक्षी भी समझते हैं। हम सब महाराज जी से सदैव प्रेरणा लेते हैं और यह सब सरल हो जाता है। प्रेम में कोई अपेक्षा नहीं होती कोई #स्वार्थ नहीं होता। यह तो बस #आस्था, #विश्वास और सच्चे #आनंद की प्राप्ति है।

जय #गुरुदेव।
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