कर्म
#मानवता को एक सकारात्मक दिशा और #आदर्श प्रदान करना ही सन्यासियों का लक्ष्य है । यदि कोई #सन्यासी पेशे से #इंजीनियर #वैज्ञानिक #शिक्षक या #डॉक्टर है #संन्यास व्यवस्था के अंतर्गत रहते हुए भी वह अपने दायित्वों को निभा सकता है #कर्म का अनावश्यक त्याग उचित नहीं है। यदि सभी अपने कर्मों का त्याग कर देंगे तो समाज में उपद्रव और अराजकता फैलेगी। व्यक्ति कर्म करने से नाहक डरते हैं । कर्म से न तो नए कर्म पैदा होते हैं ना पुनर्जन्म। उनकी उत्पत्ति का कारण तो अशुभ फल और कर्मों में #आसक्ति है।
#जय #गुरुदेव
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