वृत्तियाँ
कामुकता, क्रोध और आसक्ति नरक के द्वार हैं यदि तुम किसी चीज को खाली नहीं करोगे तो उसे भरोगे कैसे। विवाह वस्तुतः गहरी आसक्ति है। यदि आप विवाहित हैं तो ईश्वर से जुड़ने के लिए गहरी भक्ति कथा गहरे अनुशासन की आवश्यकता होगी। मैं यहां भी हूं और अमेरिका में भी हूं। मुझे जहां कोई याद करता है वही मैं जाता हूं एक बार कैंची आश्रम में विचार विमर्श के बीच महाराज जी ने कहा था कि आप लोग समझते हैं कि मैं #संपत्ति इकट्ठी कर रहा हूं और जमीदार बनना चाहता हूं मुझे किसी भी वस्तु से जरा भी आसक्ति नहीं है। मैं वैसे ही सब कुछ छोड़ दूंगा जैसे मैंने #लंका छोड़ी थी।
" तुम्हरो रूप लोग नहीं जानें।
जापे कृपा करहु सोइ माने।। "
#जय#गुरुदेव।
babaneebkarorimaharaj.com
Comments
Post a Comment