महाराज जी
#महाराज जी उच्चकोटि के #संत थे। वह कभी लंबे भाषण व्याख्यान नहीं देते थे ना ही कभी #धर्म #ग्रंथों का हवाला देते थे वह सदा परिस्थितियों को ही उपदेश का आधार बनाते थे हर बात को थोड़े ही शब्दों में या संकेत में समझा देते थे। उनका #मूल #उद्देश्य भक्तों की प्रवृत्ति बदलना था उन्हें ईश्वर उन्मुक्त करना था तथा #परोपकारी बनाना था ।वह कहते थे यह सारी सृष्टि #ईश्वर की ही #सृष्टि है सब की सेवा करो भले ही वह कोई चोर क्यों न हो। यदि तुम्हारे पास कोई भूखा आता है तो उसे ##भोजन दो, हर व्यक्ति भोजन प्राप्त करने का अधिकारी है जब महाराज जी से पूछा जाता था कि कौन सी #साधना की जाए तो उनका उत्तर होता था मानव मात्र की सेवा करने से ही तुम्हें #मुक्ति मिल सकती है तुम्हें ना ध्यान करने की आवश्यकता है ना #पूजा करने की, सभी जीवों की #सेवा करो।
#जय #गुरदेव।
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