आश्रम
स्वयं को #आश्रम की कठिनाइयों के लिए स्वेच्छा से समर्पण कर स्वयं उनका पालन करके हम अपनी मजबूत, स्थिर और संतुलित मानसिक स्थिति विकसित करते हैं और इससे हम कई #मनोवैज्ञानिक समस्याओं का #समाधान एवम उनको बेहतर तरीके से समझने में सक्षम होते हैं। परिणामस्वरूप हम इस संसार का अधिक आसानी से, रचनात्मक और सहजता से सामना कर सकते हैं। इस प्रकार #आश्रम विकासवादी प्रक्रिया में एक उत्प्रेरक एजेंट है, इसलिए पूर्ण लाभ हासिल करने के लिए सभी व्यक्तियों को सभी गतिविधियों में भाग लेना चाहिए और आश्रम के दैनिक कार्यों, विकास और #प्रगति में भी योगदान देना चाहिए।
#जय #गुरूदेव
🌷🌷#वृन्दावन #धाम 🌷🌷
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